Communicable diseases (संक्रामक रोग)

आपने कभी गौर किया है। कि शहर में या आपके आसपास के कुछ लोग किसी खास समय/ मौसम में एक ही प्रकार के रोग से ग्रसित हो रहे हैं। ऐसे रोगों को संक्रामक रोग (communicable diseases) कहते हैं।

संक्रामक रोग उन बीमारियों को कहते हैं जो सुक्ष्म जीवाणुओं के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलते हैं। यह जीवाणु नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते हैं। तथा हवा, पानी भोजन तथा आपसी संपर्क से फैलते हैं। इसके अलावा अन्य दूसरी बीमारियों को असंक्रामक रोग कहते हैं।

communicable diseases / संक्रामक रोग कैसे फैलता है।


कई तरीकों से संक्रामक रोग फैलते हैं। इसके तरीके तथा कुछ सामान्य बीमारियों के नाम नीचे दिए जा रहे हैं।

आपसी संपर्क से होने वाले संक्रमण रोग।

यह वह बीमारियां है जो त्वचा के संपर्क से, वस्त्र के संपर्क से या यौन संबंधों से फैलते हैं। यौन रोग जैसे,

  • सिफलिस
  • गोनोरिया
  • एड्स
  • सुजाक आदि।

अन्य रोगों में जैसे,

  • लेप्रोसी
  • कुष्ठरोग
  • कल-कल
  • स्कर्वी
  • चिकन पॉक्स आदि हैं।

हवा के द्वारा फैलने वाले संक्रामक रोग।

साँस और मुंह से अधिक संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलते हैं जैसे,

  • टी.बी
  • तपेदिक
  • खसरा
  • सर्दी
  • जुकाम
  • डिप्थीरिया आदि

कभी-कभी यह महामारी का रूप ले लेते हैं। जैसे इनफ्लुएंजा आदि ऐसे वायरस या बैक्ट्रिया व्यक्ति के श्वसन प्रक्रिया के साथ बाहर निकलते हैं और दूसरे व्यक्ति के नाक या मुंह के रास्ते उनके शरीर में प्रवेश कर शरीर में संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं।

दूषित जल द्वारा फैलने वाली संक्रामक बीमारियां।  (water borne disease)

बहुत से ऐसे संक्रामक रोग (communicable diseases) है। जो संक्रमित जल द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलते हैं। ध्यान रहे इनमें वह बीमारियां नहीं है जो जल में घुलनशील विषैले रसायनों द्वारा उत्पन्न होती है। इनमें बहुत सी बीमारियां स्थानीय स्तर तक ही सीमित रहती है। पर कभी-कभी वह महामारी का रूप भी ले लेती है जैसे,

मृदा जन्य संक्रमण रोग। मिट्टी के माध्यम से फैलने वाली बीमारियां (soil borne communicable diseases)

व्यक्ति जब पैर या हाथ से मीठी के संपर्क में आता है तो उसमें मौजूद परजीवी या बैक्ट्रिया उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके उदाहरण में हम

  • राउंड वॉर्म
  • हुक वार्म आदि को रख सकते हैं।

यह जीवाणु मिट्टी में सक्रिय रूप में स्पोर के रूप में मौजूद रहते हैं।

जंतु जनित संक्रमण (Animal borne communicable diseases)

बहुत सी बीमारियां हैं। जिन्हें फैलाने में हमारे आसपास मौजूद जीव जंतु सहायक होते हैं। उनके भीतर यह जीवाणु फलते फूलते और संरक्षित होते हैं। और बाद में आदमी के भीतर संक्रमित हो जाते हैं। कुछ रोग जानवरों के काटने से भी मनुष्य में फैलते हैं जैसे,

रेबीज – संक्रमित कुत्ते बंदर बिल्ली के माध्यम से पहनते हैं।

प्लेग – यह चूहे के माध्यम से आदमी तक फैलता है।

संक्रमित खाद जनित रोग (Food borne communicable diseases)

ऐसे खाद्य पदार्थ जो बैक्टीरिया या परजीवी द्वारा संक्रमित होते हैं। और उसे यदि व्यक्ति खाता है तो यह उसके शरीर में स्थानांतरित हो जाते हैं जैसे – अमीबीएसिस, फूड प्वाइजनिंग (भोजन विषाक्तता) टेपवर्म इनफेक्शन (संक्रमित मवेशियों के मांस खाने से फैलता है)।

मच्छर मक्खियों से फैलने वाले रोग insect borne communicable disease

बहुत सी बीमारियां मक्खी और मच्छर के कारण फैलती है। जैसे,

  • डेंगू
  • फाइलेरिया
  • मलेरिया
  • डारिया
  • चिकनगुनिया आदि।

 

communicable diseases

communicable diseases

वहक जो संक्रामक बीमारियों को फैलाते हैं।


इन जीवाणुओं के द्वारा संक्रामक बीमारियां (communicable diseases) अधिक फैलती है। इन जीवाणुओं में वायरस बैक्टीरिया एवं परजीवी प्रमुख हैं। इन जीवाणुओं में खुद चलकर फैलने की क्षमता नहीं होती है। इन्हें किसी माध्यम की जरूरत होती है। जहां यह अपने को बढ़ाते हैं और दूसरे तक फैलने का आश्रय पाते हैं। उचित माध्यम ना मिलने पर यह जीवाणु या तो नष्ट हो जाते हैं या चुप चाप पड़े कहते हैं। जब तक इन के अनुकूल वातावरण नहीं मिलता।

संवाहक (vector)

बहुत ऐसे संवाहक हैं। जो जीवाणुओं को फैलने में मदद करते हैं। जैसे वायु, जल, मच्छर, मक्खी, पशु पक्षी आदि। इनमें कुछ तो उनके लिए संरक्षण का काम करते हैं और कुछ है जिनमें यह जीवाणु अपना विकास करते हैं। तथा संक्रामक रूप धारण करते हैं। और कुछ ऐसे हैं जो सिर्फ एक से दूसरे व्यक्ति तक खेलते हैं लेकिन खुद उसमें शामिल नहीं होते हैं।

पर्यावरण (Environment)

बहुत ऐसे जीवाणु हैं जो गर्मी, बरसात के मौसम में ज्यादा तेजी से फैलते हैं तो कुछ सर्दियों के मौसम में अत्याधिक तेजी से फैलते हैं। साल का अलग-अलग महीना अलग-अलग जीवाणुओं के लिए अलग-अलग रूप से अनुकूल या प्रतिकूल होता है।

संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने का उपाय।


संक्रामक रोगों के नियंत्रण का अलग-अलग उपाय है पर मूल सिद्धांत यही है कि इनके प्रसार के तरीकों को जानकर उस में अवरोध पैदा कर देना ताकि इनकी वृद्धि और इनका प्रचार रुक सके।

तो आइए जानते हैं संक्रामक रोगों का नियंत्रण के मुख्य उपायों के बारे में।

 

वाहक रोगी (Carriers)

यह वह रोगी है। जो स्वस्थ प्रतीत होते हैं। इनमें रोग के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते किंतु उनके भीतर जीवाणु मौजूद रहते हैं। यह दूसरों तक बीमारी विभिन्न माध्यमों से फैलाते रहते हैं। इनकी पहचान जरूरी है अन्यथा रोक पर नियंत्रण करना मुश्किल होता है।

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)

प्रत्येक व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता अलग अलग होती है। कुछ लोग जीवाणुओं के प्रति अधिक संवेदी sensitive होते हैं। उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। कुछ लोग कम संवेदी (less sensitive) होते हैं। उनमें जीवाणुओं का संक्रमण कम होता है यह हमारे खान-पान रोग प्रतिरोधक शक्ति अनुवांशिक कारण आदि। कई बातों पर निर्भर करता है।

 

स्रोत (source)

बीमार व्यक्ति संक्रमण के मुख्य स्रोत होते हैं। जिसके माध्यम से रोग उनके परिजनों पड़ोसियों गांव और गांव के बाहर तक फैलता है।

 

पृथक्करण (Isolation)

संक्रमित व्यक्तियों को संक्रमण दूर होने तक अन्य लोगों के संपर्क से दूर रखने को आइसोलेशन करते हैं।

 

स्रोत की पहचान (Identify source)

सबसे पहले हमें व्यक्ति की उचित जांच पड़ताल तथा चिकित्सक के सहयोग से उसकी बीमारी और उसकी अवस्था का सही निदान करना आवश्यक है। फिर उसके उपचार और आइसोलेशन का प्रबंध करना चाहिए उस क्षेत्र में इस रोग से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करके उन्हें अस्पताल में वार्ड में चिकित्सा उपलब्ध करानी चाहिए।

अन्य स्रोत जैसे प्रदूषित जो मच्छर मक्खी आदि की पहचान कर उनके नियंत्रण के उपाय करना चाहिए।

इसे भी जाने 

Tetanus in hindi

Tetanus in Hindi कारण/लझण/उपचार

टिटनस (Tetanus in Hindi) एक खतरनाक बीमारी मानी जाती है, जो बैक्टीरियल संक्रमण के कारण उत्पन्न होता है। टिटनेस जिस ...
Read More
Chamki fever से बिहार में 100 से ज्यादा बच्चों की जाने जा चुकी है, 2014 और 2017 में ये बीमारी बिहार में महामारी फैला चुकी है।

Chamki Fever(चमकी बुखार) लझण/कारण/वचाब/क्या करें/क्या नहीं

चमकी बुखार (Chamki Fever), एक्यूट इंसेफेलाइटिस, जापानी बुखार या दिमागी बुखार यह सभी एक ही बीमारी के नाम हैं। जो ...
Read More
polio in hindi

Polio in hindi लझण/जाँच/उपचार/रोक-थाम/क्या करें-क्या नहीं

Polio in hindi लझण | जाँच | उपचार | रोक-थाम | क्या करें | क्या नहीं  आपने अपने आस-पास जरूर कोई ...
Read More
communicable diseases

communicable diseases (संक्रामक रोग) फैलने का मुख्या कारण और रोक-थाम

Communicable diseases (संक्रामक रोग) आपने कभी गौर किया है। कि शहर में या आपके आसपास के कुछ लोग किसी खास ...
Read More
asthma in hindi

दमा (अस्थमा) कारण/लक्षण/बचाव/इलाज Asthma in Hindi

लझण | कारण | प्रकार | जाँच |उपचार |बचाव  अस्थमा (Asthma in Hindi) एक स्वसन तंत्र की बीमारी है। अस्थमा ...
Read More
symptoms of swine flue in hindi

swine flu symptoms in hindi स्वाइन फ्लू के गंभीर लक्षण

प्रमुख लक्षण | बच्चों में दिखने वाले गंभीर लक्षण | व्यस्को में दिखने वाले गंभीर लक्षण | गंभीर लक्षणों के ...
Read More
swine flu in hindi

स्वाइन फ्लू-कारण/लक्षण/जाॅच/उपचार Swine flu in Hindi

Swine flu in Hindi-पूरी जानकारी कारण | किन व्यक्तियों में है ज्यादा खतरा | जटिलताएं | प्रमुख लक्षण | जांच ...
Read More

मधुमेह के सुरूआती और प्रमुख लक्षण-Diabetes symptoms in Hindi

Diabetes symptoms in Hindi-मधुमेह के प्रमुख लक्षण मधुमेह क्या है? | डायबिटीज के प्रकार |  लक्षण | सावधानियां  हम लोग प्रतिदिन जो ...
Read More

मधुमेह/Diabetes in Hindi-लक्षण,कारण,सावधानियां,प्रकार

Diabetes in Hindi/मधुमेह मधुमेह क्या है? | डायबिटीज के प्रकार | लक्षण | कारण | सावधानियां | क्या करें | ...
Read More
Breast cancer symptoms Hindi

स्तन कैंसर के प्रमुख लक्षण-Breast cancer symptoms Hindi

स्तन कैंसर के प्रमुख लक्षण-Breast cancer symptoms Hindi   शुरुआती दौर में स्तन के लक्षणो को देख कर अगर स्तन कैंसर ...
Read More
 


1 Comment

Ajay jangid · May 19, 2019 at 4:48 pm

Sir me aapki website ke liye guest post likhna chahta hoon. Please muze ek chance dijiye.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *