Fabiflu Glenmark (Fabiflu tablet in Hindi)

कोरोनावायरस के सक्रिय मामले हिंदुस्तान में रोजाना बढ़ते जा रहे हैं। लॉकडाउन खत्म होने के बाद कोरोनावायरस के सक्रिय मामले और तेजी से बढ़े हैं। रोजाना 24 घंटे में 10,000 से ऊपर सक्रिय मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हिंदुस्तान में इस वायरस से मरने वालों की संख्या रोजाना बढ़ते जा रही है। पूरी दुनिया इस वायरस के चपेट में आ चुका है। पूरी दुनिया में मरने वालों की संख्या लाखों तक जा चुकी है और इससे संक्रमित लोगों की संख्या करोड़ों में पहुंचने वाली है। चीन के वुहान शहर से निकला हुआ यह वायरस आज पूरी दुनिया में तबाही का कारण बना हुआ है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इस वायरस के कारण खत्म हो चुकी है।

अभी तक कारगर हो चुकी दवाइयाँ। 

पूरी दुनिया की अनुसंधान प्रयोगशाला इस वायरस के वैक्सीन खोजने में लगे हुए हैं लेकिन अभी तक किसी भी देश को इसमें कामयाबी नहीं मिली है। हालांकि किसी भी वैक्सीनस के अनुसंधान में लगभग 10 से 15 सालों का समय लगता है लेकिन कोरोनावायरस एक ऐसी सर्वव्यापी महामारी है जिसके लिए वैक्सीन और दवाइयों का खोजा जाना बेहद ही जरूरी हो चुका है।

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अभी तक जितनी भी दवाइयां सामने आई है वह कोरोनावायरस के मरीजों पर कुछ हद तक प्रभाव जरूर डाला है लेकिन वह दवाइयां कोरोनावायरस के मरीजों पर पूरी तरह सफलता हासिल नहीं कर पाया है अभी तक जीतनी भी दवाओं को बेहतर माना जा रहा था उनमें से हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन (hydroxychloroquine) बेहद चर्चित दवा थी जिसका निर्माण भारत में सबसे ज्यादा होता है।  इसके बाद जो दवाइयां कारगर साबित हुई उनमें से डेक्सोना/dexona (dexamethasone) है जो उन कोरोनावायरस के मरीजों पर कारगर साबित हो रहा है जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है थी और जो वेंटिलेटर पर पड़े हुए थे।

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फेबिफ्लु भारत में बानी कोरोनावायरस की पहली दवा। 

भारत के ग्लेनमार्क Glenmark कंपनी ने यह दावा किया है कि उसने एक ऐसी दवा तैयार की है जो कोरोनावायरस के मरीजों पर कारगर साबित हो रहा है और उस दवा का नाम है फेबिफ्लु (Fabiflu). फेबिफ्लु के नाम से ग्लेनमार्क ने एक दवा मार्केट में उतारा है जिसे भारतीय औषधि महानियंत्रक (DGCI) ने भी मंजूरी दे दी है। ग्लेनमार्क का कहना है कि मामूली और मध्यम रूप से पीड़ित मरीजों के लिए यह एक एंटीवायरल दवा है। फेबिफ्लु में जिस मॉलिक्यूल का इस्तेमाल किया गया है उसका नाम फेबिपिरवीर (fabipiravir) है और इसके एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (API) को होम रिसर्च में तैयार किया गया है।

फेबिफ्लु की कीमत : Price of Fabiflu tablet in Hindi.

 कंपनी का कहना है कि कोविड-19 के इलाज के लिए फेबिफ्लु पहली खाने वाली दवा है इस लिहाज से कंपनी और भारत के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि अभी तक दुनिया भर में कहीं भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए कोई भी मौखिक दवा नहीं बन पाई है।

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फबिफ्लू की कीमत लगभग ₹103 प्रति टैबलेट के हिसाब से मार्केट में उपलब्ध होगी जिसका निर्माण ग्लेन्मर्क की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट बदी में होना शुरू हो चुका है। कंपनी के अनुसार फबिफ्लू के 34 टेबलेट स्ट्रिप की कीमत लगभग ₹3500 होगी। फबिफ्लू मुख्य रूप से फबिपिरवीर के 200mg के रूप में मार्केट में उपलब्ध होगी।

फेबिफ्लु की खुराक : Dosage of Fabiflu in Hindi.

कंपनी का मानना है कि इस दवा की अनुमति भारत में उस समय दी गई है जब इस के मामले हिंदुस्तान में काफी तेजी से बढ़ रहे हैं और उन मामलों को नियंत्रित करने में यह दवा काफी कारगर साबित होगी।

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इस दवा की खुराक मुख्य रूप से पहला दिन 1800 mg दो बार की होगी, उसके बाद 14 दिनों तक निरंतर रूप से 800mg दो बार इस्तेमाल करने की सलाह दी जाएगी। कंपनी का मानना है कि इस खुराक से कोरोनावायरस से प्रभावित लोगों की संख्या में कमी होगी और भारत इस दवा के द्वारा कोरोनावायरस से लड़ने में सक्षम होगा।


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