Filaria in Hindi

कारण | लझण | उपचार | दवाइयाँ

लिंफेटिक फलेरिया ( lymphatic filariasis) और हाथी पांव उष्णकटिबंधीय और उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ज्यादा पाया जाने वाला संक्रमण है। अफ्रीका, साउथ ईस्ट एशिया, साउथ अमेरिका इसमें से मुख्य क्षेत्र माना जाता है। हालांकि लिंफेटिक्स फलेरिया सभी क्षेत्रों में दिखने वाला संक्रमण है। यह किसी भी उम्र में होने वाला संक्रमण है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों में सामान्य रूप से होने बाला संक्रमण है। 49 देशों के 893 मिलियन लोग इस संक्रमण से ग्रसित है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

और पढ़ें COVID-19 day to day symptoms

फलेरिया मच्छरों के द्वारा फैलने वाला संक्रमण है जो सभी उम्र के लोगों में सामान्य रूप से देखा गया है। यह हमारे लिंफेटिक सिस्टम ( lymphatic system) को नुकसान पहुंचाता है जिससे हमारे शरीर की कार्य क्षमता प्रभावित होती है और हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगता है।

लिंफेटिक सिस्टम (lymphatic system)

लिंफेटिक सिस्टम (lymphatic system) अंग और ऊतकों का एक जाल है जो हमारे शरीर के जहरीले और गंदे ( toxic waste and unwanted material) पदार्थों को हमारे शरीर से बाहर निकालता है। टॉन्सिल, एडिनॉइड, स्प्लीन, थायमस यह सभी लिंफेटिक सिस्टम के अंश है। जब किसी भी संक्रमण के द्वारा हमारा लिंफेटिक सिस्टम प्रभावित होता है तो हमारे शरीर गंदे और जहरीले पदार्थ हमारे शरीर के बाहर नहीं निकल पाते हैं जिसके कारण हमारे शरीर की कार्य क्षमता प्रभावित होती है।

और पढ़ें टिटनस कैसे होता है।

फाइलेरिया होने का कारण:Causes of lymphatic filaria in Hindi.

फाइलेरिया होने का कारण वोर्म्स को माना जाता है और यह मुख्य रूप से मच्छरों के द्वारा फैलाया जाता है। अलग-अलग तरह के मच्छरों को फाइलेरिया संक्रमण को फैलाने के लिए जिम्मेवार माना गया है और यह मुख्य रूप से क्षेत्र पर निर्भर करता है।

कुलिक्ष मच्छर (Culix Mosquito): यह मच्छर मुख्य रूप से शहरी और मध्य शहरी क्षेत्रों के लिए जिम्मेदार होते हैं मुख्य रूप से कुलिक्ष मच्छर के द्वारा शहरी और मध्य शहरी क्षेत्रों में फलेरिया संक्रमण फैलते देखा गया है।

एनोफिलीस मच्छर (Anophelex mosquito): यह मच्छर मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इस संक्रमण को फैलाने के लिए जिम्मेदार पाया गया है मुख्य रूप से एनाफिलीज मच्छर के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में फलेरिया संक्रमण खेलते देखा गया है।

एडीज मच्छर (Aedes mosquito): इस मच्छर के द्वारा मुख्य रूप से पेसिफिक आइसलैंड के क्षेत्रों में इस संक्रमण को फैलाने का जिम्मेदार पाया गया है

जब संक्रमित मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है तो परिपक्व लारवा त्वचा से होते हुए हमारे शरीर में प्रवेश करता है उसके बाद वह कृमि लिम्फैटीक वाहिकाओं में व्यस्क कृमि के रूप में विकसित होता है उसके व्यस्क क्रीमी हमारे पूरे लिंफेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है। विकसित क्रीमी हमारे लिंफेटिक वाहिकाओं में लगभग 6 से 8 सालों तक जीवित रहता है। 6 से 8 सालों में देश वह विकसित क्रीमी लाखों माइक्रोफाइलेरिया को जन्म देता है जो हमारे रक्त वाहिकाओं में परवाह करते रहता है।

और पढ़ें पोलियो कैसे होता है।

लिंफेटिक फैलेरिया फ़ैलाने के तीन कृमि। 

लिंफेटिक फैलेरिया और हाथीपाओ मुख्य रूप से तीन कर्मियों के द्वारा होते हुए देखा गया है।

वुचेरिया बैनक्रॉफ्टी (Wuchereria bancrofti): फैलेरिया के 90% संक्रमण इसी क्रीमी के जरिए होते हुए देखा गया है।

बृगिया मलाई (Brugia malayi): फलेरिया के 10% के अंतर्गत आने वाले मामले इस क्रीमी के द्वारा देखे गए हैं।

बृगिया तिमोरि (Brugia timori): फलेरिया के 10% के अंतर्गत आने वाले मामले इस क्रीमी के द्वारा देखे गए हैं।

और पढ़ें दमा से ऐसे बचें

लिंफेटिक फाइलेरिया के लक्षण : Symptoms of lymphatic filaria in Hindi.

फाइलेरिया में कुछ सामान्य लक्षण देखे गए हैं जिसमें मुख्य हमारे शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन और दर्द होता है

  • लिंफेटिक फाइलेरिया हमारे शरीर के कुछ हिस्सों को ही प्रभावित करता है जिसमें से मुख्य है पैर, स्तन हाथ और हाइड्रोसिल।
  • यह संक्रमण पैरों को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
  • शरीर के जिस हिस्से मैं यह संक्रमण होता है उस हिस्से में सूजन तथा हुआ हिस्सा बड़ा हो जाता है जिसके कारण शरीर के उस हिस्से में दर्द और हिलने में तकलीफ होनी शुरू हो जाती है।
  • शरीर के जिस हिस्से को भी यह संक्रमण प्रभावित करता है वह हिस्सा सूखा मोटा और सामान हिस्सों से ज्यादा गहरा रंग का हो जाता है।
  • हाथी पर हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है जिसके कारण एक से अधिक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • कुछ लोगों में इस संक्रमण के कारण अलग से कुछ लक्षण दिखते हैं रुकने से प्रमुख है बुखार और ठंड लगना

और पढ़ें Revital | Health ok

लिंफेटिक फैलेरिया का उपचार : Treatment of lymphatic filaria in Hindi.

लिंफेटिक फैलेरिया का उपचार संभव है। कीमोथेरपी के माध्यम से संक्रमण के प्रसार को रोककर लिंफेटिक्स फैलेरिया का उन्मूलन संभव है। कीमोथेरेपी के साथ कुछ ऐसी दवाएं जिसका साल में दो बार खुराक काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। इन दवाओं के इस्तेमाल से व्यस्त क्रीमी पर इन दवाओं का असर मध्य स्तरीय होता है। लेकिन खून में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया के घनत्व को कम करने के लिए यह दवाइयां काफी उपयोगी साबित होती हैं। जब खून में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया की संख्या घटने लगती है तो मच्छरों के द्वारा लिंफेटिक फैलेरिया के फैलाव को रोका जा सकता है।

इन दवाओं मे प्रमूख्य है।

  • Albendazole 400 mg

एल्बेंडाजोल 400 एमजी को साल में दो बार लेने की आवश्यकता हो सकती है। एल्बेंडाजोल 400 एमजी व्यस्क क्रीमी पर मध्य स्तरीय प्रभाव डालता है। परंतु खुन में मौजूद माइक्रोफाइलेरिया के घनत्व को कम करता है।

  • Ivermectin 200 mg/kg और Albendazole 400 mg
  • Diethylcarbamazine citrate 6 MG/KG और Albendazole 400 mg

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Stay Home - Stay Safe

COVID-19