Homeopathic Medicines For Typhoid in Hindi.

होम्योपैथिक दबाइयाँ | होम्योपैथिक दवाओं का मिश्रण

होम्योपैथिक दवाइयां बीमारी के जड़ों पर काम करती है जिसके कारण बीमारी को रोकने तथा खत्म करने में मदद मिलती है। टाइफाइड के लिए होम्योपैथिक दवाइयां कारगर और सुरक्षित होती हैं। सालमोनेला टायफी बैक्टीरिया जो प्रतिरोधक/ Resistance हो जाती है उन्हें भी होमियोपैथिक दवाइयां रोकने तथा खत्म करने में कारगर साबित होती है। वैसे तो बहुत सारी होम्योपैथिक दवाइयां हैं जो टाइफाइड बुखार को खत्म कर सकती हैं लेकिन इनमें से कुछ ऐसी होम्योपैथिक दवाइयां हैं जो टाइफाइड बुखार को पुरी तरह खत्म और कम कर सकती हैं।होम्योपैथिक दवाइयां संक्रमित व्यक्ति के लक्षणों पर चलाई जाती हैं टाइफाइड बुखार में बहुत सारे लक्षण दिखाई पड़ते हैं उन लक्ष्यों को देखकर ही होम्योपैथिक दवाइयों का चयन किया जाता है।

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टाइफाइड बुखार क्या है? : What is Typhoid Fever in Hindi ?

Typhoid Fever  बैक्टीरियल संक्रमण के द्वारा उत्पन्न एक बीमारी है। Typhoid Fever को मोतीझरा बुखार, मियादी बुखार, आंत्र ज्वर भी कहा जाता है। मियादी बुखार किसी जानवर के द्वारा नहीं फैलता और ना ही किसी कीड़े मकोड़े और मच्छर के काटने से फैलता है। यह संक्रमण मुख्यतः एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। टाइफाइड बुखार मुख्यतः संक्रमित व्यक्ति के मल के द्वारा फैलाई जाने वाली गंदगी के कारण दूसरे व्यक्तियों में पहुंचता है। यह संक्रमण बच्चों के स्वास्थ्य के लिए ज्यादा गंभीर खतरा है।

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यह बुखार मुखयतः साल्मोनेला टाइफी नामक बैक्टीरिया से उत्पन्न होता है। बरसात के मौसम में टाइफाइड के मामले बढ़ जाते हैं इसका कारण यह है कि बरसात में पेयजल के संक्रमित व प्रदूषित होने की आशंकाएं काफी बढ़ जाती है। यह बैक्ट्रिया प्रदूषित पेयजल व खाद्य पदार्थों के सेवन से मनुष्यो तक पहुंचाता है। सालमोनेला टायफी बैक्टीरिया मुंह के द्वारा आंतों तक पहुंचता है आंतों में यह 1 से 3 सप्ताह तक अपनी संख्या को बढ़ाता है उसके बाद यह आंतों के दीवारों से होते हुए खून में चला जाता है। अगर इस संक्रमण का इलाज नहीं किया गया तो 25% मामलों में इस संक्रमण के कारण मौत हो जाती हैं। अगर समय रहते इसका उपचार किया गया तो 4% से 5% मामलों में इससे मौत देखी गई है।

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टाइफाइड बुखार के लिए होम्योपैथिक दवाइयां : Homeopathic Medicines For Typhoid in Hindi.

टाइफोयेडिनम, बैपटीशिया, ब्रायोनिया, रस टैक्स, आर्सेनिक एलव, अर्निका, जेलसिमियम यह होम्योपैथिक के प्रमुख दवाइयां हैं, जो टाइफाइड बुखार में उसके लक्षण के अनुसार चलाई जाती हैं।

टाइफोयेडिनम 200 (Typhoidinum 200)

यह बिमारी के प्रारंभिक अवस्था में दी जाती है अगर किसी जगह पर टाइफाइड बुखार फैला है तो इस दवा का एक या दो मात्रा उपयोग करने से बीमारी होने का भय नहीं रहता तथा संक्रमण में वृद्धि नहीं हो पाती है।

बैपटीशिया (Baptesia)

इस औषधि का प्रभाव टाइफाइड बुखार में बेहतर देखा गया है। कुछ चिकित्सकों के मतानुसार रोग के आरंभ से अंत तक निम्न शक्ति में इस औषधि का प्रयोग करने से रोगी ठीक हो जाता है तथा उसे किसी अन्य औषधि की आवश्यकता नहीं रहती है। यह दवा टाइफाइड बुखार की एक मुख्य औषधि है क्योंकि रोगी के अधिकांश लक्षण इसी में पाए जाते हैं।

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ब्रायोनिया (Bryonia) :

 ब्रायोनिया भी इस रोग की एक मुख्य औषधि मानी जाती है।

लक्षण / symptoms :

संपूर्ण शरीर में दुखने जैसी अनुभूति होना, हर प्रकार की हरकत से घबराहट, सिर में फट जाने जैसा दर्द तथा दर्द के कारण सिर को हिला भी ना पाना, प्रातः काल के समय सिर का भारी हो जाना, अत्यधिक प्यास लगना,  खांसी आना, जीभ पर सफेदी आना।

इन सभी लक्षणों में ब्रायोनिया बेहतर लाभ देता है।

रस टॉक्स (Rhus tox)

यह औषधि भी टाइफाइड के लक्षण में विशेष हितकर है।

लक्षण / symptoms :

सर में दर्द होना, दुर्गंध युक्त दस्त आना, पेट में दर्द होना, पीठ एवं शारीरिक अंगों में दर्द होना, बेहोशी की हालत में बड़बड़ाना।

टाइफाइड बुखार के इन सभी लक्षणों में डॉक्टरों के द्वारा दी जाने वाली औषधि है।

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टाइफाइड बुखार के लिए होम्योपैथिक दवाइयां

आर्सेनिक एलव (Arsenic album)

इस औषधि का उपयोग बीमारी के आरंभ में नहीं किया जाता आर्सेनिक एल्बा इन लक्षणों में हितकर है।

लक्षण/ symptoms :

अत्यधिक शक्ति हीनता, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, बेचैनी, घबराहट, कभी कभी बेहोशी आना, मुंह में जख्म, दांतों में मवाद, काले रंग के दुर्गंध युक्त दस्त, तीव्र ज्वर, शरीर पर फुंसियां निकलना, लगातार प्यास लगते रहना, मध्य रात्रि अथवा उसके बाद रोग के लक्षणों में वृद्धि।

अर्निका (Arnica)

आरंभ में इस औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।  अगर बीमारी किसी भी दवाओं से ठीक नहीं हो रही है तो इस औषधि का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह औषधि इन लक्षणों वाले टाइफाइड बुखार को खत्म कर सकती है।

लक्षण / symptoms :

सांसों में बदबू आना, काले लाल या पीले दाने निकलना, सिर का गर्म तथा शरीर का ठंडा रहना, कुछ बोलते बोलते सो जाना, अनजाने में शौच एवं मूत्र का निकलना।

ये सभी इस औषधि के मुख्य लक्षण है।

लैकेसिस (Lachesis)

टाइफाइड के बढ़ जाने पर ही इस औषधि का उपयोग किया जाता है आरंभ में इस औषधि का उपयोग नहीं किया जाता है।

इन लक्षणों में यह औषधि लाभ पहुंचाता है।

लक्षण / symptoms :

प्यास ना लगना, नीचे का जबड़ा झूल जाना, शरीर के किसी भी भाग में काला धब्बा होना, दुर्गंध युक्त दस्त होना,

यह सब इस औषधि के मुख्य लक्षण है।

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टाइफाइड के लिए होम्योपैथिक दवाओं का मिश्रण : Mixed Homeopathic Medicines for Typhoid in Hindi.

होमियोपैथिक दवाओ के मिश्रण से भी टाइफाइड बुखार को रोका जा सकता है। होम्योपैथिक दवाओं के मिश्रण को बनाने के लिए 3 से 6 होम्योपैथिक दवाओं की आवश्यकता एक साथ पढ़ती है। इन दवाओं का मिश्रण आप अपने घर पर ना करें क्योंकि सही मात्रा में मिश्रित होम्योपैथिक दवाएं ही टाइफाइड बुखार को खत्म कर सकती है।

*किसी भी होमियोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले आप अपने नजदीकी होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

आर्सेनिक एल्ब/Arsenic Alb. 30 + बैपटीशिया/ Baptesia 30 + रस टॉक्स/Rus Tox 30 

एक औंस एक्वा में मिलाकर प्रतिदिन तीन बार लें।

प्यास जी मिचलाना, दस्त आदि लक्षणों में लाभ होता है।

टाइफोयेडिनम (Typhoidinum 30) +  ब्रायोनिया (Bryonia 30) + बैपटीशिया (Baptesia 30)

इन सभी को 1 ड्राम ग्लोबल में मिलाकर 5 गोली प्रतिदिन तीन बार 

कब्ज, दाने स्पष्ट दिखाई न देना, आदि लक्षणों में आराम होता है।

आर्सेनिक एल्ब/Arsenic Alb. 30 + जेल्सेमियम/Gelsemium 6x + टाइफोयेडिनम/Typhoidinum 30 + ब्रायोनिया/Bryonia 30 +  बैपटीशिया/ Baptesia 30

सभी को 1 ड्राम ग्लोबल में मिला लें 5 गोली प्रतेयक 4 घंटे पर दें। 

साधारण टाइफाइड के प्रतेयक लक्छण में यह दवा उपयोगी है। 

*किसी भी होमियोपैथिक दवाओं का इस्तेमाल करने से पहले आप अपने नजदीकी होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।


1 Comment

Jack Arnette · February 7, 2019 at 2:41 pm

Wow, this was usefull. Keep writing this kind of stories, you will get a lot of people to this post if you continue working on this. I will be coming back this post more often. thanks again

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