Nipah virus Hindi – इतिहास/बचाव/लझण/इलाज

Nipah virus की पुरी जनकारी और इतिहास

यहाँ पर आप जानेगें ……….

  • क्या है NIPAH VIRUS Hindi 
  • SIGNS & SYMPTOMS : NIPAH VIRUS के लझण 
  • NIPAH VIRUS से कैसे बच सकते है : PREVENTION of Nipah virus Hindi
  • इलाज : TREATMENT of Nipah virus Hindi
  • इतिहास : HISTORY of Nipah virus Hindi

क्या है  निपाह वायरस  : What is Nipah Virus Hindi 

Nipah virus एक जानलेबा VIRUS है जो एक तरह के फल खाने बाले चमगादड़ के द्वारा फैलता है। Nipah virus चमगदड़ से किसी भी जानबर में और फिर जानबर से इंसानो में पहुँचता है।  उसके बाद एक इंसान से दूसरे इंसानो में फैलता है।यह VIRUS संक्रमित फल को खाने से सीधे तौर पर मनुष्यों में भी पहुँचता है। Nipah virus को ZOONOSIS VIRUS भी कहते है। 
 

निपाह वायरस के लझण : SIGNS & SYMPTOMS of Nipah Virus Hindi

इसके लक्छण 3 -14 दिनों में दिखने सुरु हो जाते है। इसके जो शुरुआती लक्छण है बो………………

    • मस्तिष्क मे सुजन
    • सिर दर्द
    • उनींदापन और विचलन
    • मांसपेशियों मे तेज दर्द
    • उल्टी आना
    • मानसिक भ्रम
24 दिनों के अंदर मनुस्य कोमा में चला जाता है और फिर उसकी मौत भी हो जाती है। 

कैसे बच सकते है  निपाह वायरस से : Preventation from Nipah Virus Hindi

  • Nipah virus का अभी तक कोई भी इलाज नहीं निकला है, इसलिए इसका बचाब ही एकमात्र इलाज है।
  • यह VIRUS मुख्यत: फल खाने बाले चमगादड़ में पाए जाते है, इसलिए चमगादड़ के रहने बाले इलाके से दूर रहे।
  • Nipah VIRUS चमगादड़ से पसुओ में जाता है मुख्यता सुआर : जो लोग जांबरो के नजदीक ज्यादा रहते है उनसे दुरी बनाये।
  • यह Virus जहाँ भी फैला हुआ हो वहां जाने से बचें। 
  • जिन जगहों पर निपाह वायरस फैला हुआ है वहां जाने से बचें।
  • फलों को देख कर खाएं बो फल किसी भी पछि के जरिये काटा गया हो।
TREATMENT: इलाज:-
  • इस वायरस का अभी तक कोई भी (EFFECTIVE TREATMENT) इलाज नहीं निकला है।
  • किसी भी क्षेत्र में अभी तक निपह वायरस का कोई भी इलाज ढूंढा नहीं गया है।
  • इसलिए इससे बचाव ही एकमात्र इसका इलाज है। 
Nipah virus Hindi
Nipah virus Hindi

इतिहास : History of Nipah virus Hindi:-

1998 मलेसिआ

 1998 में मलेसिआ के काँग पुन्ग सुगाइ नामक जगह के सुअरो में पहली बार इस VIRUS को पाया गया। सुअरों के नजदीक रहने के कारण एक ब्यक्ति की मौत हो गयी थी। जब तक पता चल पता की ये कौन सा VIRUS है तब तक इसVIRUS से ग्रसित 50 % लोगों की जान जा चुकी थी। सूअरों में ये VIRUS फल खाने बाले चमगादड़ से आये थे।
मलेशिया में यह सुअरों में पहली बार पाया गया था। सूअरों में पाए जाने के बाद यह वायरस मनुष्य तक फैला और मनुष्य में महामारी का रूप ले लिया। मलेशिया में इसके कारण बहुत सारे जाने गई थी। मलेशिया के बाद यह वायरस सभी जगहों पर धीरे-धीरे कर फैलना शुरु हो गया। 

1999 सिंगापूर :   

दूसरी बार ये सिंगापूर में पाया गया सिंगापूर में भी इसके कारण बहुत सरे जाने गई थी। जब यह वायरस सिंगापुर में दूसरी बार फैला तो वहां पर भी फैलने का कारण फल खाने वाले चमगादड़ ही थे। सिंगापुर ने इस वायरस को अपने देश से बहुत ही जल्दी खत्म कर दिया था। जिसके कारण बहुत ज्यादा लोगों की जाने बची थी। 

2001 भारत :   

तीसरी बार ये भारत के WEST BENGAL के सिलीगुड़ी में फैला था। वहाँ भी ये फल खाने बाले चमगादड़ से ही फैला था। जब यह वायरस सिलीगुड़ी में फैला तो पूरे बांग्लादेश में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया था।  पूरे भारतवर्ष में एक डर का माहौल पैदा हो गया था। क्योंकि इस वायरस के कारण मलेशिया और सिंगापुर में बहुत सारे लोगों की अकस्मात मौतें हुई थी। 

2004 बंगलादेश : 

चौथी बार ये बंगलादेश में फैला, अभी तक सबसे जयदा जाने बंगलादेश में  गई है। बांग्लादेश में निपाह वायरस एक महामारी के रूप में फैला था।   बांग्लादेश की सरकार इसे खत्म करने में नाकाम साबित हो रही थी। निपाह वायरस फैलने के कारण पूरे बांग्लादेश में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया।   निपाह वायरस के कारण बांग्लादेश में अभी तक सबसे ज्यादा जाने गई थी।  बांग्लादेश में बहुत सारे लोग इसके कारण मारे गए थे। 

2018 भारत  :

पंचबी बार ये भारत के केरला में फैला है। यंहा भी फल खाने बाले चमगादड़ से ही ये फैला है। 

पांचवी बार यह भारत के केरला में फैला। दरअसल दो बच्चे कुएं में गिरे हुए फल को खाए थे और उस कुएं में कुछ चमगादड़ मरे पड़े थे,और वह वही चमगादड़ थे जिसमें निपाह वायरस पनपता है। चमगादड़ के मरे होने के कारण उस कुएं का पानी पूरी तरह से संक्रमित हो चुका था।  जब वह फल को उन दोनों बच्चों ने खाया तो निपाह वायरस का संक्रमण उन दोनों बच्चों में चला गया,वहीं से शुरू हुआ केरला में पांचवी बार निपाह वायरस का फैलना। फल खाने के कुछ दिनों के बाद वह दोनों बच्चे बीमार रहने लगे। जिसके कारण उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया और वहीं से पता चला कि इन्हें निपाह वायरस का संक्रमण हुआ है।



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