स्वाइन फ्लू-कारण/लक्षण/जाॅच/उपचार Swine flu in Hindi


Swine flu in Hindi-पूरी जानकारी

कारण | किन व्यक्तियों में है ज्यादा खतरा | जटिलताएं | प्रमुख लक्षण | जांच | इलाज | वैकल्पिक चिकित्सा | कैसे बचें | टीकाकरण

स्वाइन फ्लू (swine flu in hindi) के नाम से जाना जाने वाला इन्फ्लूएंजा एक विशेष प्रकार के वायरस इनफ्लुएंजा ‘ए’  एच1 एन1 के कारण फैलता है। यह वायरस सूअर में पाए जाने वाले कई प्रकार के वायरसों में से एक है। सूअर के शरीर में इस वायरस के रहने और उत्पन्न होने के कारण ही इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता है।

वायरसों के ‘जीन्स’ में स्वाभाविक तौर पर समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। फलस्वरूप इसके कवच (आवरण) की संरचना में भी परिवर्तन होते हैं। 1918 में जब फ्लू की महामारी सामने आई थी, और जिस वायरस के कारण यह फ्लू अत्यधिक फैला था। उस वायरस का स्रोत सूअर को माना गया था। यह तथ्य सर्वेक्षण में सामने आए थे। इस फ्लू को स्पेनिश फ्लू के नाम से भी जाना जाता है।

2009 में फैला स्वाइन फ्लू भी एक महामारी के रूप में सामने आया था। यह स्वाइन फ्लू इनफ्लुएंजा ‘ए’ टाइप के एक नए वायरस एच1 एन1 के कारण फैली थी वायरस के जींस परिवर्तन से बनी यह नई किस्म ही मेक्सिको, अमेरिका और पूरे विश्व में स्वाइन फ्लू का प्रसार का कारण बना हुआ है।

स्वाइन फ्लू फ़ैलने का कारण : Cause of Swine flu in hindi


स्वाइन फ्लू फैलने का मुख्य कारण इनफ्लुएंजा ए एच1 एन1 वायरस को माना जाता है। सूअरों को इनफ्लुएंजा ‘ए’ एच1 एन1 वायरस का प्रथम स्रोत माना गया है। यह वायरस सूअरों में बहुत ही आसानी से पनपता है। यह वायरस सूअरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन सूअरों के नजदीक रहने वाले व्यक्तियों में यह वायरस बहुत जल्द फैलता है। स्वाइन फ्लू फैलने का और भी कई कारणों को माना जाता है। स्वाइन फ्लू का संक्रमण व्यक्ति को स्वाइन फ्लू के रोगी के संपर्क में आने पर होता है। इस रोग से प्रभावित व्यक्ति को

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  • स्पर्श करने (जैसे हाथ मिलाना, गले लगना)
  • छिंकने से
  • खांसने से
  • पीड़ित व्यक्ति की वस्तुओं के संपर्क में आने से

स्वाइन फ्लू से स्वस्थ व्यक्ति ग्रसित हो जाता है। स्वाइन फ्लू के वायरस स्वस्थ व्यक्ति के नाक, कान, मुंह से, स्वसन मार्ग से, फेफड़े में प्रवेश करता है। कई लोगों में यह संक्रमण बीमारी का रूप नहीं ले पाता है। जिन लोगों में स्वाइन फ्लू का वायरस प्रवेश करता है उनमें से कई लोगों को केवल सर्दी, जुकाम और गले में खराश की शिकायत दिखाई देती है और उसके बाद यह संक्रमण खत्म हो जाता है।

2010 में अधिकारिक तौर पर स्वाइन फ्लू को एक महामारी घोषित की गई थी जो मुख्यतः इनफ्लुएंजा ए एच1 एन1 के कारण उत्पन्न होती है लेकिन आज के समय में यह एक सामान्य मौसमी फ्लू माना जाता है लेकिन इनफ्लुएंजाए एच1 एन1 जटील होती है तो यह एक घातक बीमारी के रूप में सामने आती है

स्वाइन फ्लू से इन व्यक्तियों को है ज्यादा खतरा : The people have more danger from swine flu in hindi.

कुछ अनुसंधानो के अनुसार वैसे लोग जो स्वाइन फ्लू से ग्रसित व्यक्तियों के संपर्क में जाते हैं। उनमें से 50% स्वाइन फ्लू के संक्रमण से बच जाते हैं, या उन्हें सर्दी, खांसी, गले में खराश की समस्या उत्पन्न होती है, और कुछ समय बाद वह खत्म हो जाती है। लेकिन उनमें से 50% ऐसे व्यक्ति होते हैं जो इन्फ्लूएंजा ए से संक्रमित हो जाते हैं, और उनमें इनफ्लुएंजा ए जटिल रूप में पहुंच जाता है। स्वाइन फ्लू से इन लोगों को है ज्यादा खतरा,

रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।


ऐसे लोग जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है। वे लोग अतिशीघ्र इस वायरस से संक्रमित हो जाते हैं, जैसे बच्चे, बृध, डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति, एचआईवी से ग्रसित व्यक्ति, आदि

दमा और ब्रोंकाइटिस के मरीज।


जो लोग दमा और ब्रोंकाइटिस जैसे बीमारियों से ग्रसित होते हैं, उनमें भी यह संक्रमण जल्द होने का खतरा बना रहता है। वैसे लोग जो दमा और ब्रोंकाइटिस से ग्रसित होते हैं, उनके फेफड़े और श्वसन प्रणाली पहले से ही संक्रमित रहती है, जिसके कारण  इनफ्लुएंजा ए वायरस को फैलने में मदद मिलती है।

नशा करने वाले व्यक्ति।


जो लोग नशे की लत से ग्रसित हैं। उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पाई गई है, जिसके कारण यह वायरस नशा करने बाले लोगों में बहुत आसानी और जल्दी फैलता है।

कुपोषित एवं एनीमिया से ग्रसित लोग।


जो लोग कुपोषण के शिकार रहते हैं, और जिन लोगों में रक्त की कमी होती है। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रहती है। जिसके कारण उन लोगों में यह वायरस अतिशीघ्र फैलते देखा गया है।

जटिल बीमारियों से प्रभावित लोग


वैसे लोग जो जटिल बीमारियों से प्रभावित होते हैं। उनके शरीर में पहले से ही संक्रमण मौजूद रहती है। जिसके कारण इनफ्लुएंजा ए वायरस उनके शरीर में प्रवेश कर उस संक्रमण को और भी ज्यादा बढ़ा देता है।

गर्भवती महिलाएं।


गर्भवती महिलाएं इस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। गर्भवती महिलाओं में यह संक्रमण बहुत जल्द जटिल रूप ले लेता है, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा हो जाती है। इस संक्रमण के चपेट में आने के कारण गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर सामान्य से अधिक बढ़ जाती हैं।

स्वाइन फ्लू की जटिलताएं : Complication of swine flu in hindi.


जब किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के संक्रमण की पुष्टि हो जाती है तो स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षणों के जटिल होने से रोगी की हालत बिगड़ सकती है। अगर आप में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है तो आपको इन जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।

  • रेस्पाइरेटट्री ट्रैक्ट इनफेक्शन
  • डिहाइड्रेशन
  • निमोनिया 
  • गले का खराब होना
  • कभी-कभी छाती में तकलीफ होना आदि जटिलताएं संभव है।

इसके अलावा अगर आपको किसी भी तरह की पुरानी बीमारी है तो इस संक्रमण के कारण वह और भी गंभीर हो सकती है। जैसे,

  • अपर रेस्पाइरेटरी ट्रैक्ट (uper respiratory track infection) की बीमारियां साइनोसाइटिस आदि
  • लोअर रेस्पाइरेट्री ट्रैक्ट (lower respiratory track infection) की बीमारियां निमोनिया ब्रोंकाइटिस दमा 
  • हृदय संबंधित बीमारियां आदि

इस वायरस के संक्रमण के कारण इन बीमारियों को होने का खतरा तथा जो लोग पहले से इन बीमारियों से ग्रसित हैं उनमें और गंभीर होने का खतरा बना हुआ रहता है।

स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण : Symptoms of swine flu in hindi.

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  • तेज बुखार होना
  • खांसी आना
  • सिरदर्द होना
  • कप-कपी महसूस होना
  • कमजोरी का एहसास
  • दस्त होना
  • उल्टी होना
  • गले में तकलीफ होना
  • पूरे शरीर में दर्द होना
  • सांस लेने में तकलीफ होना

स्वाइन फ्लू को इन जाचों के जरिए पता लगाया जाता है। : The swine flu detected through these test.


अगर किसी व्यक्ति को बुखा, खांसी, सर्दी है, तो इससे यह पुष्टि नहीं हो पाती कि वह व्यक्ति स्वाइन फ्लू से ग्रसित है। किसी मरीज को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि तब मानी जा सकती है, जब नेजोफेरिंजीयल स्वाब (Nasopharyngeal swad) निम्न तीन में से किसी एक के लिए पोजिटिव हो।

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  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पीड़ित की जांच में इनफ्लुएंजा h1 n1 एंटीबॉडी की संख्या 4 गुना अधिक पाई जाए।
  • रियल टाइम पीसीआर (Real Time PCR) जांच पॉजिटिव हो
  •  वायरल कल्चर (Viral culture) की जांच पॉजिटिव हो

स्वाइन फ्लू का इलाज : Treatment of swine flu in hindi.


आज के समय में स्वाइन फ्लू का इलाज संभव है स्वाइन फ्लू के इलाज के लिए सर्वप्रथम ऊपर दी गई जांच को करवाने होंगे अगर उन जांचो में यह पुष्टि हो जाती है कि आप स्वाइन फ्लू के संक्रमण से ग्रसित हैं तो डॉक्टरों के द्वारा स्वाइन फ्लू में दी जाने वाली दवाइयों के द्वारा आप का इलाज प्रारंभ होगा

स्वाइन फ्लू का इलाज डॉक्टरों की सलाह पर रोगी के लक्षणों के आधार पर भी किया जाता है इलाज के इस प्रक्रिया में वायरस रोधी दवाओं के साथ साथ बुखार के लिए पेरासिटामोल खांसी के लिए कफ सिरप सर्दी जुकाम व छींकों  के लिए एंटी एलर्जी की दवाइयां दी जाती हैं  इनफ्लुएंजा h1 n1 के नियंत्रण के लिए जोग वायरस रोधी दवाइयां दी जा रही हैं उनमें oseltamivir phosphate खांसी में कारगर साबित हो रहा है। इसके अलावा और भी वायरस रोधी दवाइयां डॉक्टर ए के द्वारा इस्तेमाल की जा रही हैं जो स्वाइन फ्लू में कारगर साबित हो रहा हैं।

स्वाइन फ्लू के लिए अन्य उपाय व वैकल्पिक चिकित्सा : Other treatment of swine flu in hindi.


अगर आपने स्वाइन फ्लू के कोइ भी लक्षण पाए जाते हैं. या जांच में यह पुष्टि होती है कि आप स्वाइन फ्लू के संक्रमण से ग्रसित है तो आपको इन उपायों को अपने घर में जरूर अपनाना चाहिए।

  • बीमारी की अवस्था में पूरी तरह से आराम करना चाहिए।
  • स्वाइन फ्लू के संक्रमण के कारण हमारे शरीर में पानी की कमी होने लगती है इससे बचने के लिए जरूरी है, कि पेट पदार्थों का भरपूर मात्रा में सेवन किया जाए इससे बीमारी के लक्षणों में सुधार होता है।
  • काढे का प्रयोग करें

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए बहुत सारे घरेलू उपाय मौजूद हैं, उनमें से मुख्य है तुलसी, अदरक, लोंग, काली मिर्च और गुरिच के काढे का प्रयोग इसका डे के प्रयोग से बीमारी के लक्षणों में सुधार होता है।

  • पेय पदार्थों का सेवन अधिक करें

स्वाइन फ्लू के संक्रमण के बाद हमारे शरीर में पानी की कमी होने लगती है। शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए आप गुनगुने पानी या अन्य पेय पदार्थों का इस्तेमाल कर सकते हैं। चाय के सेवन से भी राहत मिलती है।

  • खानपान में सुधार अवश्य करें

अगर आप स्वाइन फ्लू के संक्रमण से ग्रसित हैं, तो आपको अपने खान-पान में सुधार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। खाद्य पदार्थों में आप हल्के और सुपाच्य भोजन का इस्तेमाल करें। एक बार में अधिक भोजन ग्रहण ना करें भोजन चंद घंटों के अंतराल पर कई बार करना चाहिए।

  • तले हुए एवं मसालेदार और नॉनवेज का इस्तेमाल ना करें।
  • बाहरी खाद पदार्थों के इस्तेमाल करने से बचें।

स्वाइन फ्लू से बचने का तरीका अपनाएं : How to avoid swine flu in hindi.


  • अस्पतालों में जाने से पहले मास्क का इस्तेमाल जरूर करें। अस्पतालों में मास्क के इस्तेमाल से वायरस के प्रसार में कमी आती है।
  •  किसी भी व्यक्ति के खांसने और छींकने के पश्चात आप अपने नाक और मुंह पर रुमाल का इस्तेमाल की जरूर करें।
  • जिन व्यक्तियों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण है, उनके खांसी या छींक के साथ निकली सुक्ष्म बूंदों द्वारा स्वाइन फ्लू का वायरस दूसरे व्यक्तियों तक पहुंचता है। इसकी एक बूंद में एक लाख से 10 लाख तक वायरस हो सकते हैं। यह वायरस किसी भी स्तह पर 10 से 72 घंटे तक जिंदा रह सकते हैं।
  •  बिना ढके या खुली हाथो द्वारा इस्तेमाल किया हुआ खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल ना करें।
  •  जिन व्यक्तियों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण है उनसे दूर रहे।

 स्वाइन फ्लू का टीकाकरण : Vaccination of swine flu in hindi.


स्वाइन फ्लू की वैक्सीन इस बीमारी से बचाव में सहायता प्रदान करती है। स्वाइन फ्लू का टीका अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध है। यह टीका गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए भी सुरक्षित और कारगर है। इसलिए स्वाइन फ्लू के टीके को जरूर लगवाना चाहिए।

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